मोदियाबिन्द
अब जुम्मन चाचा घर कम आते हैंजब से उन्हे मोदियाबिन्द हुआ है
लोगो मे धूम भले बहुत हैं
रिश्तो मे रौनक कम गया हैं
हैरान है रंग केसरिया भी
कब मोहक रंग फीका पर गया
कुछ लोग इतने उत्तेजित है कि
उसने हरा रंग भी छुपा लिया है
अब जुम्मन चाचा घर कम आते हैं
जब से उन्हे मोदियाबिन्द हुआ है |
स्याह रंग से आँख मूंद लिए
सब चकाचौंध से भयभीत लग रहे
हम जबाब देने को इतने उतारू
कि मूल सवाल ही धरा रह गया
जो जबाब मांगता है आज भी
उसका उत्तर लफेबाजी
हमें यकीं है मेरा कुछ नही लूटा
पर जुम्मन चाचा यकीं करें तो कैसे
चार साल का बेटा, नादान बहन, बूढ़ी माँ
घर-दुकान, दीन-ईमान
कुछ भी तो नहीं भूले
अब जुम्मन चाचा घर कम आते हैं
जब से उन्हे मोदियाबिन्द हुआ है
AVINASH GAURAV