कमजोर होना दुनिया का सबसे बड़ा पाप है1 कमजोरी मृत्यु के समान है 1
सत्य का यही एक मन्त्र है -जो भी चीज अप को शारीरिक , बौद्धिक एवं आत्मिक
सत्य का यही एक मन्त्र है -जो भी चीज अप को शारीरिक , बौद्धिक एवं आत्मिक
स्तर पर दुर्बल बनाती है वह आपके लिए जहर है, वह जीवन ओर सत्य से रहित है ...........
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