Sunday, April 14, 2013

जीवन और सत्य से रहीत

कमजोर  होना  दुनिया  का  सबसे बड़ा  पाप  है1 कमजोरी मृत्यु  के  समान  है 1
सत्य  का  यही एक मन्त्र  है -जो भी चीज  अप  को शारीरिक , बौद्धिक एवं आत्मिक
स्तर पर दुर्बल बनाती है वह आपके लिए जहर है, वह जीवन ओर सत्य से रहित है ...........

विवेकानंद 

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